Sunday, September 20, 2009
अपने ही घर में बेघर हैं हम
आफ़ भू-माफिया अपनी ताकत दिखाकर जमीं हड़पना और लोगों को डरना धमकाना मामूली बात है आज मैं वैसी ही दर्दनाक घट्ना लिखने जा रहा हूँ घटना गुवाहाटी के पास असम-मेघालय बॉर्डर स्थित खानापारा की है जो २५ अगस्त २००८ की है। वहां कैसे भू-माफियाने ५०-६० से पहले रह-रहे लोगों को वहां से जमीं खाली करवाया। पहले तो वहां के लोगों को मानसिक यातना और फिर शारीरिक चोट पहुंचाकर उन्हें जबरन उस जमीं के पैसे लेने को मजबूर किया गया। भू-माफिया इतने पोवेर्फुल हैं की उनका साथ मेघालय भी दे रही है। मैं जिस जगह की बात लिख रहा हूँ पहले उस जमीन केउनकी जमीन की कागज नही मिलेगी। फिर भी २५ अगस्त 2008 तक वे वहां पर रह-रहे हैं। मगर जब समय के साथ उस जमीन की भी कीमत बढ़ने लगी तो भू-माफिया की नजर उस पर पड़ी। उन लोगों ने उस जमीन की खाली करवाने के लिए वहां पर किराये के लड़कों को कैंप लगवाकर बैठाया । किराया के लड़कों में वे लोग थे जिनसे आम नागरिक डरते हैं। में उन लोगों की बात कर रहा हूँ जो हथियार दल चुके उग्रवादी हैं इनमे सल्फा, बोडो उग्रवादी हैं जिन लोगों ने वहां रहकर कुछ को तो पिताभी। जिनके नाम मात्र से लोग डरते हैं उन्हें वहां कैंप लगवाकर रखना लोगों में दहशतwali बात थी। लोग अन्दर से वैसे ही डरे हुये थे उस पर मेघालय गोवेर्मेंट के सहयोग से ५-६ सौ पुलिस फ़ोर्स लेकर वहां के लोगों पर जिस बेरहमी से उन पर अत्याचार किया उसके बाद तो लोग और डर गए।
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